द रीयल हीरोज़ ऑफ़ सोसाइटी

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 By: Bushra Khan

इन नौजवानों से पहले और इनके बाद भी इनके जैसे कई नौजवान होंगे जो ऐसिड सरवाइवर्स को उन के हिस्से की खुशियां देने। क्या हर क्षेत्र में देश को इन जैसे नौवाजवानों की जरूरत नहीं हैं? माई के लाल सलाम करता है ऐसे माई के लालों को।

आलोक और लक्ष्मी:  पंखों से कुछ नहीं होता होसलों से उड़ान होती है

क्या एक लड़की का न कहना उस का सब से बड़ा गुनाह है? जीं हां। किसी लड़के को न कहना आमतौर पर नहीं बल्कि हमेशा लड़की के लिए घातक साबित होता है। ढे़रों उदाहरण हैं। लक्ष्मी उस समय 15 साल की थी और एक सिंगर बनने के सपने संजो रही थी। लक्ष्मी उस समय कक्षा 7वीं की छात्रा थीं जब उन से दोगुनी उम्र के व्यक्ति ने  उसे प्रपोज किया. इंकार करने पर एक दिन उस ने बीच सड़क पर लक्ष्मी पर एसिड फेंक दिया। एसिड इतना तेज था कि मांस के साथ हड्डियां भी गलने लगी थीं। खतरे को भांप  कर इस बच्ची ने तुरंत अपने हाथों से अपनी दोनों आँखें ढांक ली थीं.

ALOK AND LAXMI

हादसे के साथ लक्ष्मी की सारी खुशियां, और ख्वाब जल कर राख हो गए। मगर इस छोटी सी लड़की ने हार नहीं मानी। उस ने समाज में अपने हक की लड़ाई लड़ी। उन तमाम लड़कियों की आवाज बनी जो ऐसे जघन्य हादसों की शिकार बनीं। इस आवाज को और ताकत देने फिर एक नौवान भीड़ से निकलकर आगे आया और उस ने लक्ष्मी का हाथ पकड़कर उसमें नई जान फूंक दी। यह हैं आलोक दीक्षित। आलोक यानी रोशनी अथवा तेज। आलोक दीक्षित कानपुर के रहने वाले हैं और पत्रकारिता से भी जुड़े रहे हैं। आलोक और लक्ष्मी की मुलाकात इसी तरह की एक मुहीम के दौरान हुई थी। दोनों लंबे समय से साथ रह रहे हैं। आलोक कहते हैं कि वह शादी के बंधन में इसलिए नहीं बंधना चाहते क्योंकि कहीं न कहीं एक ओर तो वे सामाजिक प्रतिबंधों के खिलाफ लड़ रहे हैं तो फिर हम खुद इस का हिस्सा कैसे बन सकते हैं। आज आलोक और लक्ष्मी एक प्यारी सी बेटी के माता पिता बन चुके हैं।

सोनाली और चितरंजन:   चितरंजन ने दी मीठी छांव

 पेशे से इलेक्टिकल इंजीनियर चितरंजन तिवारी ने असंवेदनशीलता के मुंह पर तमाचा जड़ते हुए सोनाली से विवाह करने का फैसला किया। आज सोनाली और चितरंजन क एक साल की एक प्यारी सी बेटी है। जिसे उन्होंने नाम दिया है निहारिका।  चिरंजन के विचार उन नौजवानों से बिल्कुल अलग हैं जो बाहरी खूबसूरत के पीछे भागते फिरते हैं। चितरंजन का कहना है कि मान लीजिए मैं किसी और लड़की से शादी करता और उस के साथ यह हादसा हो जाता। या फिर मेरे ही साथ कोई अनहोनी हो जाए तो?  मैं ने सोच लिया था कि अगर शादी करूंगा तो उस लड़की से जिसे समाज के झूठे रीति-रिवाजों और परंपराओं ने हाशिये पर करने की कोशिश की हो। सोनाली को एक टीवी प्रोग्राम में देखा फिर उन से फोन पर संपर्क किया.  उन से बातें कर के मुझे इस बात का एहसास हो चुका था कि वह एक बेहद बहादुर और गजब की आत्मविश्वासी लड़की है। उस के भीतर मौजूद सकारात्मकता ने मुझे उस की ओर आकर्षित किया। समाज उन्हें चाहें जैसे देखता हो, मेरी नजर में सोनाली सब से खूबसूरत लड़की है। 

SONALI WITH CHITRANJAN

यह किसी तरह के जब्बातों में बहकर या जल्दबाजी में लिया गया फैसला नहीं था, बल्कि मैं जानता था कि मैं जो कर रहा हूं. मुझे वही करना है और करना भी चाहिए क्योंकि वह सही है। मैं ने सोनाली पर कोई उपकार नहीं  किया, मुझे उससे अथाह प्रेम है।  चितरंजन जमशेदपुर के एक छोटे से गांव कासमार से हैं। उन के इस फैसले से उन्हें शुरू में परिवार का थोड़ा बहुत विरोध भी सहना पड़ा था। चितरंजन बताते  हैं कि उनकी और सोनाली की सोच काफी हद तक एक जैसी है। दोनों न केवल अपने बल्कि समाज के लिए कुछ करना चाहते हैं। चितरंजन मानते है, कोई अकेला व्यक्ति समाज को पूरी तरह नहीं बदल सकता इस के लिए सब को आगे आना होगा। सोनाली मुखर्जी पर 2003 में उसके पड़ोस में रहने वाले कुछ लड़कों ने तेज़ाब फ़ेक दिया था जब वो 17 साल की थी.  सोनाली ने शारीरिक और मानसिक यातनाएं झेलीं मगर हार नहीं मानी.

                                                                                           शबीना शमशाद : शबीना की सीरत न दिल जीत लिया शमशाद का

कानपुर की शबीना को इसी समाज में रह रहे एक नामर्द ने दर्द दिया और एक मर्द ने उस की जिंदगी में दोबारा खुशियां भरीं। शबीना बेइन्तहा सुंदर थी। लगभग 13 साल पहले उस की शादी तय हुई थी। शादी में किन्हीं कारणों से देर होने की वजह से लड़का चाहता था कि कि शबीना उस के साथ घर से भाग कर शादी कर ले। शबीना इस के लिए राजी नहीं हुई तो उस नामर्द ने एक दिन उस पर एसिड फेंक दिया। शबीना जिंदगी और मौत की दहलीज पर आ कर खड़ी हुई। लगभग 8 सर्रजरीज के बाद उस का चेहरा इस लायक बनाया गया कि वह जिंदा रहने के लिए सांस ले सके। एक

SHABEENA AND SHAMSHAD

एनजीओ ने उस की काफी मदद की। जिंदगी कब कौन सा नया मोड़ ले ले कोई नहीं जानता। शबीना के हिस्से की खुशियां अभी उसे मिलनी बाकी थीं। ये खुशियां ले कर आए शमशाद। जिस ने शबीना को अपने जीवन साथी के रूप में चुना और जिंदगी भर उसे खुश रखने का वायदा किया।

कानपुर के शमशाद के 2 बच्चे हैं और पत्नी घर छोड़कर भाग गई थी। शमशाद कहते हैं कि इंसान की सूरत ही नहीं सीरत भी बहुत मायने रखती है। शबीना की सीरत ने उनका दिल जीत लिया। शमशाद बताते हैं कि शबीना न केवल एक अच्छी पत्नी है बल्कि मेरे बच्चों से बहुत प्यार करती हैं। शबीना का परिवार भी इस विवाह से काफी खुश था कि उन की बेटी के जीवन में एक बार फिर से बाहरें लौटआई हैं।

 ललिता बेन बंसी और रवि शंकर : रवि जैसा जीवनसाथी हर लड़की को मिले  

एक दिन अचानक ललिता बेन बंसी के मोबाइल पर एक मिस्ड काॅल आई। दूसरी तरह से रवि नामक एक युवक की आवाज थी। फिर राॅंग नंबर कहकर दोनों ने फोन काट दिया। लेकिन यह तो महज उस प्रेम कहानी का आगाज थाए जो अभी परवान चढ़नी बाकी थी। इस रांग नंबर पर अक्सर इन दो अंजानों की बात होने लगीं।  बातचीत का सिलसिला प्रेम में बदलने लगा। ललिता ने रवि को बताया कि वह एक तेजाबी हमले की शिकर लड़की हैं। रवि ने शायद मन ही मन कुछ ठान लिया था। उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि वह एसिड   सरवाइवर हैं। कुछ महीनों तक फोन पर   बातचीत का सिलसिला यूं ही चलता रहा और फिर रवि ने ललिता से शादी करने

LALITA AND RAVI

का प्रस्ताव रख दिया। मूल रूप से रांची निवासी रवि मुंबई में ही एक प्राइवेट फर्म में सीसीटीवी ओपरेटर है। 26 साल की ललिता और 27 साल के रवि ने ठाणे कोर्ट में विवाह किया तो बौलीवुड एक्टर विवेक ओबेराॅय भी दोनों को शुभकामनाएं देने पहुंचे। ललिता कहती हैं कि अगर हर एसिड अटैक शिकार लड़की को रवि शंकर जैसा लड़का मिल जाए तो उन का जीवन संवर जाए। रवि ने ललिता को इस बात का विश्वास दिलाया कि उन्हें भी अच्छी जिंदगी जीने का अधिकार है। साल 2012 में मामूली सी कहासुनी को ले कर ललिता के ममेरे भाई ने उस पर एसिड से हमला कर दिया। बुरी तरह से झुलसी ललिता की लगभग 17 बार सर्जरी हुई। उस ने अथाह मानसिक और शारीरिक कष्ट सहा। आजमगढ़ छोड़कर वह मुंबई में आ कर रहने लगी थीं।

                                                                                             नितेश और कविता : नितेश जैसे नौजवानों की जरूरत पूरे देश को

विता और नितेश दोनों पहले से ही एक दूसरे को पसंद करते थे और शादी करने का फैसला कर चुके थे। कविता जैसी खूबसूरत लड़की की इग्नोरेंस कई लोगों को चुभ रही थी कि कविता शादी के लिए किसी और को चुना। 2012 में ऐसे ही एक सनकी ने कविता पर एसिड फेेंक दिया।  लेकिन नितेश कविता की बाहरी सुंदरता मात्र से प्रेम नहीं करता था।  नितेश ने कविता का साथ नहीं छोड़ा। हालांकि हादसे के बाद कविता ने नितेश से दूरी बनाने की कोशिश भी की पर नितेश के सच्चे प्यार के सामने अधिक दिनों तक ऐसा नहीं कर सकीं।  नितेश ने न केवल कविता से शादी करने के अपने फैसले को पूरा किया बल्कि उस मुश्किल घड़ी में कविता के साथ खड़ा रहा जब सबने उस का साथ छोड़ दिया था। कविता जब इस नाइंसाफी के खिलाफ लड़ना चाहती थी मगर परिवार ने उस का साथ छोड़ दिया।

NITESH AND KAVITA

 नितेश के साथ ने उसे हारने नहीं दिया। उस ने कविता को अपराधियों के खिलाफ अदालत में लड़ने और इंसाफ हासिल का हौसला दिया। एसिड हमले के बाद  कविता की तीन बड़ी सर्जरी हुई और उन की आइब्रोज और हेयर लाइन को भी ठीक किया गया। विवाह के समय कविता को दुल्हन के रूप में सजाने के लिए हर ब्यूटी पार्लर ने मना कर दिया। कोई उन के चेहरे को नहीं छूना चाहता था। लेकिन अंतत एक पार्लर ने उन्हें परियों की तरह सजाया और लखनउ में दोनों का विवाह हुआ।

गौरव मोहिनी : नाइंसाफी के खिलाफ लड़ना सिखाया पति ने 

साल 2009 में इस कहानी की शुरूआत भी एक रांग नंबर से हुई। मोहिनी के अनुसार ”गौरव से एक रांग काॅल के जरिए गौरव से जानपहचान हुई।  2 सालों तक रांग नंबर पर बात होती रही। हम दोस्त बन गए। जब ढाई साल बाद हम मिले तो गौरव ने  भीड़ के सामने शादी के लिए प्रपोज कर दिया। मैं ने साल 2014 में शादी के लिए हांमी भरी। मुझे लगता था कि जिस तरह से लोगों ने मेरी खातिर मेरे परिवारवालों को टीका टिप्पणियां की कहीं गौरव को भी एमबेरेसमेंट महसूस न हो।”  गौरव कहते हैं कि मैं फैसला कर चुका था। शुरू में लगा था कि मेरे इस फैसले से दोस्त और परिवार वाले क्या सोचेगे? पर मेरे परिवार और दोस्तों का सब से ज्यादा सहयोग मिला। परिवार में मेरी पत्नी का सब से ज्यादा सम्मान होता है।  यह दर्दनाक घटना साल 2005 की है।

GAURAV AND MOHINI

एक मनचला लड़का मोहीनी के पीछे पड़ा था। मोहिनी से प्रेम करने के दावे करता था। लेकिन मोहिनी ने उसे मना कर दिया। यही बात शायद उसे चुभ गई थी। मना करने पर भी जब वह लड़का बाज नहीं आया तो मोहिनी ने पुलिस थाने में उस की शिकायत कर दी। वहां उस ने मोहिनी से माफी मांग ली। लेकिन बाद में बदला लेने के इरादे से उस ने मोहिनी पर एक दिन एसिड से हमला कर दिया।

मोहिनी बताती हैं कि मैं अपने परिवार में एक लौती संतान हूं। हमला होने के बाद लोगों ने मेरे मातापिता के सामने टिप्पणियां करना शुरू कर दिया था। मैं ने कई दफा आत्महत्या करने की सोची। मैं ने खुद को घर में कैद कर लिया था। अस्पताल के अलावा मैं कहीं नहीं आती जाती थी। मुझे मेरे पति से सब से ज्यादा सर्पोर्ट मिलता है।  
गौरव ने मुझे न केवल अन्य लड़किययों की तरह संजने- संवरने की सलाह दी बल्कि उन्होंने कहा कि मुझे स्कार्फ से चेहरा छुपाने की कोई जरूरत नहीं।  कविता कहती हैं, ”आज मेरी ससुराल में मुझे बेहद प्रेम और सम्मान मिलता है/ हर छोटे-बड़े फैसले में मेरी राय जरूर ली जाती है। आज हमारा एक बेटा है। मेरे पति में जो गुण हैं मैं चाहती हूं कि हम अपने बेटे को भी सिखाउं कि वह महिलाओं का सम्मान करे और सिर्फ बाहरी आकषर्ण नहीं बल्कि मन की सुंदरता को भी समझे।” 

Journalist/Writer       Bushra Khan

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