प्रेमचंद की कहानियों पर फिल्म बनाना चुनौतीपूर्ण था

By:  राजू बोहरा 

पिछले पिछले सप्ताह मुंशी प्रेमचंद्र की दो बेहद मशहूर कहानियों “कफन” और “निर्मला” पर आधारित फिल्म Óभाग्य ना जाने कोई’ रिलीज हुई। इस फिल्म में राजपाल यादव सहित नेत्रा रघुरमन, राजीव वर्मा, और साधु मेहर ने अहम किरदार निभाए हैं। यह फिल्म स्टेट्स एयर विजन के बैनर तले बनीं है। फिल्म के निदेशक हंै दिलीप गुलाटी। दिलीप पिछले करीब तीस वर्षो से फिल्म निर्देशन में सक्रिय हैं।

उनकी पिछली फिल्म अंडरवर्ड पर आधारित थी। जिसका नाम ‘माफिया बिग बॉस’ था। फिल्म में सभी कलाकार नए थे। दिलीप गुलाटी से राजू बोहरा की हुई मुलाकात के दौरान बातचीत में उन्होंने बताया कि प्रेमचंद्र की कृतियों पर बनी यह फिल्म उत्तर भारत में रिलीज हुई है और जल्दी ही मुंबई में भी प्रदर्शित की जाएगी। फिल्म की कहानी आदि के बारे में पूछने पर दिलीप ने बताया कि प्रेमचंद्र की दोनों कहानियां आज के समाज के लिए एक बड़ा संदेश देती हैं। जब यह कहानियां रची गई थीं उस समय गांव, खेत-खलिहान और को मैंने परदे पर पूरी ईमानदारी से उतारने की कोशिश की है। अब यह दर्शकों पर निर्भर है कि वे इसे कितना पसंद करते हैं।
अपने सजीव और उम्दा अभिनय के लिए पहचाने जाने वाले राजपाल यादव ने फिल्म में अहम किरदार निभाया है। फिल्म की कुछ यों है कि दो निकम्मे बाप-बेटे हंै जिनका मानना है कि ‘अजगर करे ना चाकरी, पंछी करे ना काम, दास मलुका कह गये, सबके दाता राम’। वे विश्वास इस में रखते हैं कि उन्हें अगर ईश्वर ने धरती पर भेजा है तो रोटी भी जरुर देगा। निकम्मेपन की वजह से उन्हें किन-किन मुश्किल हालात का सामना करना पड़ता है। फिल्म एक संदेश यह भी देती है कि व्यक्ति को कर्मवीर होना चाहिए।

 

वरिष्ठ पत्रकार राजू बोहरा पिछले 20  वर्षो से देश के सभी प्रमुख समाचार पत्र-पत्रिकाओ में बतौर फ्रीलांसर फिल्म- टीवी पत्रकारिता कर रहे हैं और धारावाहिको व डॉक्यूमेंट्री फिल्मों के निर्माण व निर्देशन में सक्रिय है।  दूरदर्शन व् रेडियो से भी जुड़े हुए हैं.  

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